Tuesday, April 23, 2019

‘चौकीदार चोर है’ बयान पर राहुल को अवमानना नोटिस, 30 अप्रैल को होगी सुनवाई

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को राहुल गांधी को ‘चौकीदार चोर है’ वाले बयान के लिए अवमानना का नोटिस जारी किया। कोर्ट अब इस मामले की सुनवाई 30 अप्रैल को राफेल मामले में दायर बची हुई पुनर्विचार याचिकाओं के साथ करेगा।

हाल ही में शीर्ष अदालत राफेल डील के लीक दस्तावेजों को सबूत मानकर मामले की दोबारा सुनवाई के लिए राजी हो गई थी। इस पर राहुल ने कहा था कि कोर्ट ने मान लिया कि ‘चौकीदार ही चोर है।’ इसके बाद भाजपा नेता मीनाक्षी लेखी ने कांग्रेस अध्यक्ष के खिलाफ अवमानना का केस दायर कर दिया था। इस पर कोर्ट ने राहुल को बिना नोटिस जारी किए ही जवाब मांगा। राहुल ने सोमवार को माना था कि कोर्ट ने ऐसा कुछ नहीं कहा और गर्म चुनावी माहौल में जोश में उनके मुंह से यह बात निकल गई। उन्होंने अपनी टिप्पणी पर खेद जताया था।

राहुल के खेद जताने को माफी मांगना नहीं कह सकते: रोहतगी

कोर्ट ने लेखी की तरफ से पेश हुए वकील मुकुल रोहतगी से पूछा कि राहुल ने जवाब में क्या लिखा है? इस पर रोहतगी ने कहा कि राहुल ने माना है कि उन्होंने कोर्ट का आदेश देखे बगैर पत्रकारों को गलत बयान दिया था। रोहतगी ने कहा जैसे उन्होंने खेद जताया है उसे माफ़ी मांगना नही कहा जा सकता।

इस पर राहुल की तरफ से पेश हुए वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि कोर्ट ने उनसे सिर्फ स्पष्टीकरण मांगा था जो उन्होंने दिया। कोर्ट ने उन्हे नोटिस नहीं जारी किया था। चीफ जस्टिस ने कहा कि आप कह रहे हैं कि नोटिस नही जारी हुआ तो अब नोटिस दे रहे हैं।

राहुल के खिलाफ दायर याचिका रद्द नहीं
इसी के साथ कोर्ट ने राहुल की तरफ से पेश हुए वकील अभिषेक मनु सिंघवी की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने राहुल के खिलाफ दायर याचिका रद्द करने की मांग की थी। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि हमें लगता है कि याचिका पर राहुल को नोटिस जारी किया जा सकता है। उन्होंने रजिस्ट्रार को सुनवाई मंगलवार को रखने के निर्देश दिए।

सुप्रीम कोर्ट में लगाई गई थी पुनर्विचार याचिका
सुप्रीम कोर्ट ने 14 दिसंबर 2018 के फैसले में राफेल डील को तय प्रक्रिया के तहत होना बताया था। अदालत ने उस वक्त डील को चुनौती देने वाली सभी याचिकाएं खारिज कर दी थीं। पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी और वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने डील के दस्तावेजों के आधार पर इस फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिकाएं दायर की थीं। इनमें कुछ गोपनीय दस्तावेजों की फोटो कॉपी लगाई गई थीं। इस पर अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने केंद्र की ओर से आपत्ति दर्ज कराई थी थी। उन्होंने कहा था कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 123 के तहत विशेषाधिकार वाले गोपनीय दस्तावेजों की प्रतियों को पुनर्विचार याचिका का आधार नहीं बनाया जा सकता। शीर्ष अदालत ने उनकी यह दलील खारिज कर दी थी। 

Wednesday, April 10, 2019

वायनाड में राघुल गांधी से है राहुल गांधी का मुक़ाबला

हम अक्सर ये सुनते हैं कि नाम से आख़िर क्या होता है. चुनावों के मौसम में इसकी चर्चा और अधिक होने लगती है जब एक जैसे नामों वाले उम्मीदवार मैदान में एक-दूसरे के सामने उतरते नज़र आते हैं.

ऐसा ही कुछ हो रहा है केरल की वायनाड सीट पर जहाँ कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को चुनौती देने के लिए उनके ही नाम से मिलते-जुलते दो-दो उम्मीदवार मैदान में उतरे हैं.

इनमें से एक उम्मीदवार का नाम है राघुल गांधी जो दावा करते हैं कि वो केवल नाम मिलने भर से इस दौड़ में नहीं हैं.

वो कहते हैं, "हम दोनों राजनेता हैं. राहुल गांधी एक राष्ट्रीय नेता हैं, और मैं एक राज्य स्तर का नेता. मैं एक गंभीर उम्मीदवार हूँ."

33 साल के राघुल का कांग्रेस से भी नाता रहा है. उनके पिता कांग्रेस सदस्य थे और दादा स्वतंत्रता सेनानी.

राघुल गांधी कहते हैं, "चुनाव अधिकारियों ने मेरी मदद केवल इसलिए नहीं की क्योंकि मेरा नाम राघुल गांधी है. नामांकन के लिए आवेदन में मैंने एक कॉलम नहीं भरा था और इसलिए मेरा आवेदन रद्द कर दिया गया."

राघुल ने इसके बाद ठीक उसी दिन नामांकन दाख़िल किया जिस दिन राहुल गांधी ने भी अपना पर्चा भरा.

दसवीं तक की पढ़ाई करने वाले राघुल ने कहा, "मेरे पास बहुत आयडिया हैं मगर उन्हें लागू करने के लिए मुझे ताकत चाहिए."

कोयम्बटूर में घरेलू कर्ज़ जैसी आर्थिक सेवाएं दिलाने का काम करने वाले राघुल ने कहा, "अभी के वक्त में लोग बेरोज़गारी को लेकर काफ़ी चिंतित हैं."

लेकिन इस चुनाव से राघुल गांधी क्या हासिल करने की उम्मीद रखते हैं?

इसके जवाब में वो कहते हैं, "जो पैसे मैंने प्रचार में लगाए हैं, उसे वापस पाने की उम्मीद करता हूं. इसके लिए हमें जीतने वाले उम्मीदवार का एक तिहाई वोट हासिल करना होगा. यही मेरे लिए जीत होगी."

राहुल गांधी जैसे दूसरे नाम वाले उम्मीदवार से काफ़ी कोशिशों के बावजूद संपर्क नहीं हो पाया है. लेकिन एक बड़ी पार्टी के उम्मीदवार के नाम से ही चुनाव लड़ने वाले लोगों का मामला केवल वायनाड तक ही सीमित नहीं है.

कर्नाटक के मंड्या लोकसभा क्षेत्र में सुमालथा के नाम से दो प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं. असल में यहां से एक अन्य निर्दलीय प्रत्याशी सुमालथा अम्बरीश चुनाव में खड़ी हैं जिनका कांग्रेस और बीजेपी से बाग़ी हुए लोग समर्थन कर रहे हैं.

दूर-दराज़ के गांवों में प्रचार के लिए निकले इन लोगों से भी बात नहीं हो पाई. लेकिन इनमें एक उम्मीदवार के भाई श्रीधर ने कहा कि उनकी बहन ग्राम पंचायत और तालुका बोर्ड की चैयरमैन हैं.

श्रीधर कहते हैं, "वो जनता दल सेक्युलर की सदस्य हैं. पार्टी कार्यकर्ताओं ने उनका समर्थन किया और उनसे चुनाव लड़ने को कहा क्योंकि उन्हें पहले भी प्रत्याशी बनाने को लेकर नज़रअंदाज़ किया गया था."

सुमालथा नाम के तीनों उम्मीदवारों का मुक़ाबला निखिल गौड़ा से है. निखिल गौड़ा मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी के बेटे और अभिनेता हैं.

असल में सुमालथा अम्बरीश कांग्रेस से बग़ावत करके खड़ी हुई हैं क्योंकि जेडीएस और कांग्रेस के बीच समझौते में ये सीट जेडीएस के हिस्से आई थी.

इसकी वजह ये है कि पिछले विधानसभा चुनावों में यहां की अधिकांश सीटों पर जेडीएस की जीत हुई थी.

Tuesday, April 2, 2019

रसगुल्ला मिर्च टीडीपी का गला पकड़ेगी, पर वोटर पानी भी नहीं देगा

अमित कुमार निरंजन, विजयवाड़ा. कृष्णा नदी के किनारे बसा है विजयवाड़ा। कृष्णा का यही किनारा अमरावती को भी जोड़ता है। तेलंगाना से अलग होने के बाद अमरावती (गुंटूर लोकसभा क्षेत्र) को आंध्र की राजधानी बनाया गया है। यहां हाईटेक सचिवालय है। जहां टॉयलेट का फीडबैक देने के लिए हर शौचालय के सामने  टैब लगे हैं। सचिवालय की दूसरी मंजिल पर कंट्रोल रूम से राजमुंदरी जिले में बन रहे पोलवरम बांध के काम की निगरानी की जा रही है। हालांकि, यहां के हाईटेक कैमरे कंट्रोल रूम से दो किमी दूर कूड़ा ले जा रही एम रूपा की हताशा और गुस्सा नहीं देख पाते।

अमरावती से सटे मंडम गांव से कूड़ा ले जा रही एम रूपा नगर निगम  कर्मचारी हैं। हाथ में न ग्लव्स हैं न मुंह पर मास्क। वजह पूछने पर भड़क जाती हैं। कहती हैं कि हमसे जबरन काम कराया जा रहा है। तीन महीने से पैसा नहीं मिला। सीएम कहते हैं- चुनाव का समय है। सफाई ठीक होनी चाहिए। तनख्वाह क्यों नहीं मिली...इसकी वजह बताते हुए कहती है- अफसर, नेता हमारा पैसा खा जाएंगे तो  सैलरी का फंड कहां से आएगा।

एम रूपा की स्थिति आंध्र की दूसरी ही तस्वीर दिखाती है। विकास की इस इमारत में निचला तबका सिर्फ नींव है। उधर, आंध्र के दक्षिणी हिस्से यानी कोस्तांद्रा की 7 लोकसभा सीट मच्छीपत्तनम, विजयवाड़ा, गुंटूर, नरसरावपेट, बापटला, ओंगोल और नैल्लोर की जमीनी हकीकत अलग है। यहां मिर्च के उचित दाम नहीं मिलने से किसान की जिंदगी बेहद तीखी हो गई है और पानी नहीं मिलने से नाराज वोटर सरकार का गला सूखाने के लिए तैयार बैठे हैं।

विजयवाड़ा के इनाडु अखबार में  डेढ़ दशक से राजनीति कवर कर रहे  धनजंय टेकाले  आंध्र का  चुनावी सार बताते हुए कहते हैं- प्रदेश की लोकल इंटेलिजेंस यूनिट (एलआईयू) के मुताबिक लोकसभा चुनाव में वायएसआर को 14 और टीडीपी को 10 सीट मिल सकती है। वहीं विधानसभा में वायएसआर को करीब 90 और टीडीपी को करीब 80 सीटें मिल सकती हैं।

मच्छीपत्तनम विजयवाड़ा से 60 किमी दूर है। ये वो शहर है जो एक समय ईस्ट इंडिया कंपनी का प्रमुख  व्यापारिक केंद्र  था। यहां अंग्रेजों के जमाने का बंदरगाह है। रत्न  वाॅच कंपनी के मालिक रवींद्र बाबू कहते हैं करीब सौ साल पहले तूफान के समय ब्रिटिश कलेक्टर ताोरिन हिल ने शहरियों की खूब मदद की थी, अब अफसर पैसा खाते हैं।

मच्छीपत्तनम की खासियत यह है कि नोटा यहां पिछली बार चौथे नंबर पर था।  बंदरगाह का बड़ा मुद्दा है। करीब 40% कापू वोट है। एंटी इनकंबेंसी और जनसेना के अकेले मैदान में उतरने से कापू वोट टीडीपी से कट सकता है। इसका फायदा वाईएसआर को मिल सकता है।

भारत यात्रा के इस चरण में एनटीआर का पैतृक गांव निम्माकुरू भी पड़ा। यहां सरकारी स्कूल, अस्पताल और पक्की सड़क है। बस भी चलती है। इससे उलट, गुंटूर अलग ही कहानी बयां करता है। यहां मेरिकापुड़ी गांव में तेज धूप के बीच महिला किसान डी भूलक्ष्मी मजदूरों के साथ मिर्च की छंटाई में जुटी हैं। मिर्च का नाम भले ही रसगुल्ला हो लेकिन पांच साल में इसकी कीमत में इजाफा बहुत ही मामूली हुआ है। कीमत सिर्फ 30% बढ़ी है लेकिन मजदूरी दाेगुनी हो गई। मिर्च के नुकसान से जिंदगी तीखी हो गई है।

90 किमी आगे नरसरावपेट में पानी सबसे बड़ा मुद्दा है। एस के ख्वाजा  एसआर कुत्तु  कॉलोनी में रहते हैं और उन्हें पानी लेने के लिए  रोजाना सुबह दो किमी दूर तक जाना पड़ता है। कहते हैं- इस बार पानी के नाम पर ही वोट दूंगा। ऐसे ही हालात ओंगोल के हैं। ओंगोल में जुबैन प्रजाति का बैल मिलता है। तमिलनाडु और आंध्रप्रदेश में यह लड़ाने के काम आता है। यहां श्री कृष्णा मंदिर इस प्रजाति के बैलों काे पालता है।

केयरटेकर जी. गुरवैया कहते हैं कि गौशाला में बोरिंग तो है, लेकिन पानी की इतनी किल्लत है कि जानवरों को पीने का पानी नहीं मिलता। 100 किमी दूर नैल्लोर पहुंचते-पहुंचते पानी और सूखता जाता है। यहां पुल से गुजरने पर पहली नजर में बंजर जमीन दिखती है। लोगों ने बताया ये पेन्ना नदी है। जिसमें दूर-दूर तक पानी की एक बूंद भी नहीं दिख रही थी। नैल्लोर में पिछली बार वाईएसआर नेता मेकाचंति राजा मोहन रेड्‌डी सांसद चुने गए थे। इस बार इन्हें टीडीपी ने टिकट दिया है।

क्षेत्रीय स्तर पर पीने का पानी और प्राइवेट पोर्ट प्रमुख मुद्दा है। रेड्‌डी वोट की संख्या करीब 50% है। इसलिए एंटी इनकम्बेंसी का असर यहां नहीं होगा। बापटला  और ओंगोल, इन दाेनों क्षेत्रों का राजनीति और सामाजिक मिजाज लगभग एक जैसा है। बापटला में रामायापट्नम पोर्ट का मुद्दा अहम है। क्योंकि इससे रोजगार बढ़ने की संभावना है। लेकिन काम ही शुरू नहीं हो पाया।

फ्रीलांसर राजनीतिक शोधकर्ता अनंत कुमार कहते हैं- इस बार आंध्र में पानी, विकास और भ्रष्टाचार प्रमुख मुद्दे हैं। 1993 के बाद से राज्य के हर चुनाव जाति केंद्रित हो गए हैं। आंध्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी की सदस्य पद्मश्री ने बताया कि राज्य में फिलहाल तो विशेष राज्य का दर्जा ही मुद्दा है। वाईएसआर के मीडिया कॉर्डिनेटर मस्तान ने कहा लोग प्रदेश में बदलाव के लिए वोट करने वाले हैं।

सबसे बड़ा फैक्टर क्या रहेगा?

मुद्दे- मिर्च, काॅटन के अलावा भ्रष्टाचार : मिर्च व कॉटन के दाम के अलावा भ्रष्टाचार और विकास भी मुद्दा है। पानी का मुद्दा भी उछल रहा है। राज्य सरकार को एंटीइनकंबेंसी का सामना करना पड़ सकता है। सर्जिकल स्ट्राइक, ट्रिपल तलाक का मुद्दा बहुत कम है यानी भाजपा को इसका फायदा नहीं मिलेगा। नोटबंदी का असर है।

जाति- कोपू, दलित और किसान यहां निर्णायक रहेंगे : कोपू, दलित वोट के अलावा यहां खम्म और वाशियार वोट अहम हैं। यह चार सीटों पर असर डालेंगे। मिर्च, कॉटन की खेती करने वालेे 70% किसानों का वोट भी असर डालेगा। जनसेना के अलग लड़ने से टीडीपी का कोपू वोट कट सकता है। सात लोकसभा सीटों पर कोपू  वोट करीब 30%, दलित 25%, रेड्‌डी और  नायडू वोट 15%  और खम्म 10%  हैं।

津冀地区连续驻留满14天的来京人员不再居家观察14天

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